महाराजा पोरस (Porus Saurasenis) की वीर गाथा !!
प्राचीन भारत में झेलम नदी के किनारे एक महान योद्धा राजा का शासन था—महाराजा पोरस सैनी। वे अपने साहस, स्वाभिमान और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध थे।
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| Porus or Poros (Ancient Greek: Πῶρος Pôros; fl. 326–321 BC) was an ancient Indian king whose territory spanned the region between the Hydaspes (Jhelum/Vitasta) and Acesines (Chenab/Asikani) rivers. |
जब सिकंदर अपनी विशाल सेना के साथ भारत की ओर बढ़ा, तो उसका सामना महाराजा पोरस सैनी से हुआ। झेलम नदी के तट पर दोनों सेनाओं के बीच भयंकर युद्ध हुआ। पोरस सैनी ने अपने सैनिकों और युद्ध हाथियों के साथ बहादुरी से सिकंदर की सेना का सामना किया।
युद्ध में पोरस सैनी घायल हुए और उन्हें बंदी बना लिया गया। जब सिकंदर ने उनसे पूछा कि “तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाए?” तो पोरस सैनी ने निर्भीक होकर उत्तर दिया—
“राजा के साथ राजा जैसा व्यवहार किया जाए।”
उनके आत्मसम्मान और वीरता से प्रभावित होकर सिकंदर ने पोरस सैनी को उनका राज्य वापस कर दिया और उन्हें अपना सहयोगी बनाया।
महाराजा पोरस सैनी की कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा योद्धा परिस्थितियों से नहीं डरता—वह अपने स्वाभिमान और मातृभूमि के लिए अंत तक खड़ा रहता है।

