भारत की कौन-कौन सी जाति Saini Caste के "सरनेम" का इस्तेमाल करते हैं और सैनी कितने प्रकार के होते हैं?

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भारत की कौन-कौन सी जाति Saini Caste के "सरनेम" का इस्तेमाल करते हैं और सैनी कितने प्रकार के होते हैं?


उत्तर भारत में सैनी जाति के लोग सैनी नाम से ही जाने जाते हैं , यह अपने आप को गर्व से चंद्रवंशी शूरसैनी ही कहते हैं और उत्तर भारत के शूरसैनी अपने आप को असली सैनी मानते हैं । चंद्रवंशी शूरसैनी जाति के लोग अपने आप को कभी भी अन्य जातियों से नहीं जोड़ते हैं , यह अपने आप को केवल सैनी ही कहते हैं ।


वहीं माली जाति और माली जाति की उपजातियां " सैनी जाति " के सरनेम का इस्तेमाल करती हैं राजस्थान की माली जाति ने 1937 के वक्त सैनी नाम अपनाया था और यह एक षड्यंत्र के तहत हुआ था और असली सैनी इन्हें नकली सैनी मानते हैं । जब से माली जाति की कई उपजातियां सैनी जाति के नाम का इस्तेमाल करने लगी हैं तब से सैनी कई प्रकार के हो गए हैं और सैनी जाति को उत्तर भारत में पिछड़ी जाति में शामिल कर लिया गया :

Saini community History: The Mali caste began adopting the "Saini" surname and identity in regions like Rajasthan, Delhi, Uttar Pradesh and parts of northern India starting around the 1937s.
Saini community History: The Mali caste began adopting the "Saini" surname and identity in regions like Rajasthan, Delhi, Uttar Pradesh and parts of northern India starting around the 1937s.


1. जम्मू , पंजाब, हरियाणा ,उत्तराखंड , हिमाचल और दिल्ली : सैनी जाति के लोगों को पुरु शूरसैनी और शूरसैनी के नाम से जाना जाता है ।

शूरसैनीयों का इतिहास :- भारत के कई बड़े इतिहासकार मानते हैं कि चंद्रवंशी शूरसैनी प्राचीन जाती है , इस जाति का इतिहास 500 साल से भी अधिक पुराना है और भारत के कई इतिहासकारों का मानना है कि जैसे प्राचीन काल में जाट , गुर्जर और अहीर जाति के कबीले होते थे वैसे ही काबिले शूरसैनी जाति के भी थे । पाकिस्तान के पंजाब में आज भी 200 साल पुराना सैनी स्कूल और कॉलेज हैं , जो यह साबित करता है कि शूरसैनी जाति की मौजूदगी प्राचीन कल से ही है और चंद्रवंशी शूरसैनी जाति के योद्धा जाट , सिख और ठाकुर राजाओं की सेना के सेनापति होते थे जो यह साबित करते हैं कि शूरसैनी जाति का संबंध क्षत्रिय योद्धा जाति से हैं । शूरसैनी जाति के नाम से ही सैनी जाति के सरनेम की उत्पत्ति हुई है । इनके जाति प्रमाण पत्र में इन्हें सैनी ही कहा जाता है और पहले शूरसैनी जाति " सवर्ण जातियों " में शामिल थी यानी की समान वर्ण (General caste ) मैं शामिल थी । बाद में अन्य जातियां भी सैनी जाति के नाम का इस्तेमाल करने लगी जिसके कारण इस जाति की छवि खराब हुई है और इस जाति में जो जातियां शामिल हुई थी वह आर्थिक रूप से बहुत कमजोर थी , जिस कारण भारत सरकार ने सैनी जाति को पिछड़ी जाति ( OBC ) में शामिल कर लिया है ।

शूरसैनी जाति की बड़ी आबादी पंजाब और हरियाणा में पाई जाती है , इस जाति के लोग सेना में बड़े अधिकारी होते हैं और बड़े जमींदार भी होते हैं । चंद्रवंशी शूरसैनी ही असली सैनी है जो प्राचीन काल से अपनी संस्कृति से जुड़े हुए हैं ‌।

Saini community History: The Mali caste began adopting the "Saini" surname and identity in regions like Rajasthan, Delhi, Uttar Pradesh and parts of northern India starting around the 1937s.
Saini community History: The Mali caste began adopting the "Saini" surname and identity in regions like Rajasthan, Delhi, Uttar Pradesh and parts of northern India starting around the 1937s.

2. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश : सैनी जाति के लोगों को भागीरथी माली के नाम से जाना जाता है । यह लोग पहले " फूल माली " के नाम से भी जाने जाते थे ।

भागीरथी माली का इतिहास : - भारत के बड़े इतिहासकार मानते हैं कि भागीरथी माली प्राचीन जाति हैं । इस जातियों के लोग मूल रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं , भागीरथी जाति के लोगों को सगरवंशी भी कहा जाता था और इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि इस जातियों का संबंध राजा सागर और राजा भगीरथ से है ‌। जो कि सगरवंशी है, मां गंगा को धरती पर लाने वाले राजा भगीरथ के वंशजों को भागीरथी माली कहा जाता है । यह जाति ठाकुर क्षत्रिय जाति की उपजातियां हैं ।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भागीरथी माली 1985 से पहले अपने आप को माली कहते थे , इनके गांव और कस्बों को " मालीवाडा " के नाम से भी जाना जाता था । उत्तर प्रदेश सरकार ने भागीरथी माली लोगों को अलग-अलग श्रेणी में रखती थी , पर जब यह लोग अपने आप को माली कहने लगे तो इन्हें माली जाति की श्रेणी में ही रखा गया था, बाद में यह लोग अपने आप को सैनी जाति से जोड़ने लगे और आज यह लोग अपने आप को सैनी जाति का हिस्सा मानते हैं ।

वर्तमान में भागीरथी माली अपने आप को सूर्यवंशी बोलते हैं और यह मौर्य , कुशवाहा ,शाक्य और माली जाति से अपना संबंध बताते हैं । भागीरथी अपने आप को मौर्यवंशी भी मानने लगे हैं, भागीरथी अपने आप को बुद्ध धर्म से जोड़कर देखते हैं ।

भागीरथी मूल रूप से छोटे किसान हुआ करते थे , जो फल फ्रूट और सब्जी की खेती किया करते थे और आज भी यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सब्जी बेचने का कार्य करते हैं ।

भागीरथी माली वक्त वक्त पर अपना सरनेम बदलते रहे हैं । पहले माली , फिर भागीरथी, फिर सैनी और अब मौर्य कुशवाहा शाक्य आदि... इन्हें भारत सरकार ने बैकवर्ड समाज ( OBC ) की श्रेणी में रखा है ।

Saini community History: The Mali caste began adopting the "Saini" surname and identity in regions like Rajasthan, Delhi, Uttar Pradesh and parts of northern India starting around the 1937s.
Saini community History: The Mali caste began adopting the "Saini" surname and identity in regions like Rajasthan, Delhi, Uttar Pradesh and parts of northern India starting around the 1937s.

3. राजस्थान और महाराष्ट्र : माली सैनी ( नकली सैनी ) , राजस्थान के माली जाति ने 1937 में एक षड्यंत्र के तहत सैनी जाति का नाम अपनाया था और आपको बता दें कि राजस्थान में जितनी आबादी माली जाति की थी उतनी ही आबादी ही सैनी जाति की भी थी । माली जाति के लोग ब्रिटिश सरकार से चाहते थे कि उन्हें " सैनिक क्षत्रीय " का दर्जा मिले और जब उन्हें इस की इजाजत मिली तो उन्होंने एक षड्यंत्र के तहत सैनिक को बदलकर सैनी कर दिया और इसका प्रचार पूरे राजस्थान में किया जिसके वजह से राजस्थान के माली जाति के लोग अपने आप को सैनी कहने लगे । केवल राजस्थान में ही सैनी और माली जाति को एक जाति माना जाता है ।

Saini community History: The Mali caste began adopting the "Saini" surname and identity in regions like Rajasthan, Delhi, Uttar Pradesh and parts of northern India starting around the 1937s.
Saini community History: The Mali caste began adopting the "Saini" surname and identity in regions like Rajasthan, Delhi, Uttar Pradesh and parts of northern India starting around the 1937s.


ठाकुर क्षत्रिय मालीयो ( सैनिक क्षत्रीय माली ) के सभी गोत्र " क्षत्रिय ठाकुरों " के गोत्रों से मिलते हैं , उदाहरण के तौर पर गहलोत ,पवार, भाटी, चौहान , राठौर, सोलंकी और तंवर आदि । पर राजस्थान के ठाकुर क्षत्रिय इन्हें अपना नहीं मानते इसलिए यह सैनी जाति के सरनेम का इस्तेमाल करते हैं और यह वही माली है जिन्होंने 1937 में जोधपुर की कोर्ट में कैसे लड़ा और बाद में अपने आप को " सैनिक क्षत्रीय " कहने लगे बाद में इन्होंने " सैनिक " को बदलकर " सैनी " कर दिया और अपने आप को सैनी कहना शुरू कर दिया । आज के राजस्थान में यह सैनी OBC " बैकवर्ड समाज " की श्रेणी में आते हैं ।
Saini community History: The Mali caste began adopting the "Saini" surname and identity in regions like Rajasthan, Delhi, Uttar Pradesh and parts of northern India starting around the 1937s.
Saini community History: The Mali caste began adopting the "Saini" surname and identity in regions like Rajasthan, Delhi, Uttar Pradesh and parts of northern India starting around the 1937s.

Article source from SainiCaste.Com: SAINI CASTE HISTORY https://sites.google.com/view/saini-caste/home



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